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भगवद्गीता 2:34 का अर्थ | धर्मयुद्ध का महत्व

      🌼 भगवद्गीता 2:34 — मूल श्लोक " अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम् । संभावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते ॥ " गीता 2:34: सम्मान वीरों की सबसे बड़ी संपत्ति है ⭐ सरल हिंदी अनुवाद हे अर्जुन! यदि तुम युद्ध से भागोगे तो लोग तुम्हारी स्थायी बदनामी करेंगे। और एक सम्मानित और प्रतिष्ठित व्यक्ति के लिए बदनामी मृत्यु से भी अधिक दुखद और कष्टदायक है। 🌼 शब्दार्थ अकीर्तिम् — बदनामी, अपयश च — और अपि — भी भूतानि — सभी लोग, सभी प्राणी कथयिष्यन्ति — कहेंगे, चर्चा करेंगे ते — तुम्हारी अव्ययाम् — कभी न मिटने वाली, स्थायी संभावितस्य — सम्मानित व्यक्ति के लिए, जिसकी समाज में प्रतिष्ठा हो अकीर्तिः — अपयश, बदनामी मरणात् — मृत्यु से अतिरिच्यते — भी अधिक है, उससे भी बुरा है 🌟 भूमिका यह श्लोक केवल अर्जुन को ही प्रेरित नहीं करता, बल्कि हर व्यक्ति को यह समझाता है कि 👉 सम्मान (Honor) 👉 कर्तव्य (Duty) 👉 चरित्र (Character) जीवन में कितने महत्वपूर्ण हैं। भगवान कृष्ण यहां अर्जुन की मनोवैज्ञानिक स्थि...