कर्म, अकर्म और विकर्म में क्या अंतर है? – भगवद गीता 4:17
प्रश्न: गीता 4:17 में कर्म, अकर्म और विकर्म के बारे में क्या कहा गया है? उत्तर: गीता 4:17 में श्रीकृष्ण कहते हैं कि कर्म क्या है, अकर्म क्या है और विकर्म क्या है — यह समझना बहुत कठिन है। इसलिए मनुष्य को इन तीनों के भेद को अच्छी तरह जानना चाहिए। 🎯 भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि गीता 4:17 में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि कर्म, विकर्म और अकर्म – इन तीनों को समझना आवश्यक है। कर्म का मार्ग अत्यंत गहरा है, इसलिए व्यक्ति को यह जानना चाहिए कि कौन सा कर्म सही है, कौन सा गलत है और किस प्रकार कर्म करते हुए भी बंधन से मुक्त रहा जा सकता है। कर्म का मार्ग इतना गहरा क्यों है? हम हर दिन असंख्य कार्य करते हैं। कुछ कार्य सही होते हैं, कुछ गलत, और कुछ ऐसे भी होते हैं जिनका प्रभाव हमें तुरंत समझ में नहीं आता। गीता 4:17 में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि कर्म का मार्ग अत्यंत गहरा और जटिल है। इसलिए यह समझना आवश्यक है कि कौन सा कर्म धर्म के अनुसार है, कौन सा अधर्म है, और किस प्रकार कर्म करते हुए भी मनुष्य बंधन से मुक्त रह सकता है। 🕉️ गीता अध्याय 4 श्लोक 17 (Geeta 4:17) कर्मणो ह्यप...