प्रश्न: गीता 3:40 में काम के निवास स्थान कौन-से बताए गए हैं? उत्तर: गीता 3:40 में श्रीकृष्ण कहते हैं कि इंद्रियाँ, मन और बुद्धि — ये काम के अधिष्ठान हैं। इनके माध्यम से ही काम ज्ञान को ढककर मनुष्य को मोहित करता है। अगर इच्छा इतनी गहरी बैठी है, तो उस पर नियंत्रण कैसे पाया जाए? श्रीकृष्ण ने बताया कि इच्छा इंद्रियों, मन और बुद्धि में निवास करती है। अब गीता 3:40 में वे समाधान का क्रम बताते हैं — कहाँ से शुरुआत करनी है। 📘 अध्याय 3 – कर्मयोग (पूरा संग्रह): भगवद गीता अध्याय 3 (कर्मयोग) – सभी श्लोकों का सरल अर्थ व जीवन उपयोग इस अध्याय में कर्मयोग के सभी श्लोक क्रमवार दिए गए हैं, जहाँ निष्काम कर्म, यज्ञ भाव और कर्तव्य पालन को आज के जीवन से जोड़कर समझाया गया है। गीता 3:40 – आत्म-नियंत्रण का स्पष्ट क्रम गीता 3:39 में यह स्पष्ट हुआ कि इच्छा केवल भावना नहीं, बल्कि एक पूरा नियंत्रण तंत्र है। गीता 3:40 उस तंत्र को उल्टा करने की कुंजी देती है। 📜 भगवद्गीता 3:40 – मूल संस्कृत श्लोक इन्द्रियाणि मनो बुद्धिरस्याधिष्ठानमुच्यते । एतैर्विमोहयत्येष...