जब तर्क भावनाओं से हार जाए। अर्जुन अपने प्रियजनों के विरुद्ध युद्ध को पाप मानते हैं। यह श्लोक मानवीय संवेदनाओं को दर्शाता है, जहाँ सही और गलत के बीच मन उलझ जाता है।
Geeta 2:4 – FAQ
Q1. अर्जुन की समस्या क्या है?
A. वह अपने पूजनीय गुरुओं से युद्ध नहीं करना चाहता।
Q2. यह श्लोक किस भावना को दर्शाता है?
A. अर्जुन की करुणा और दुविधा।
Geeta 2:4 – Confusion का चरम
अर्जुन अपने कर्तव्य और भावनाओं के बीच फँस जाता है। यह स्थिति आज के जीवन में भी आम है।
Career, family और personal values के बीच लोग अक्सर confused हो जाते हैं। यह श्लोक दिखाता है कि जब भावनाएँ हावी हो जाती हैं, तो निर्णय कठिन हो जाते हैं।
Life Better कैसे करें?
- Decision लेते समय long-term सोचें
- Emotion और responsibility में संतुलन रखें
- स्पष्ट मूल्य तय करें
संतुलन ही सही निर्णय की कुंजी है।
इस वेबसाइट पर प्रकाशित सभी लेख, जानकारी और विचार केवल सामान्य जानकारी एवं शैक्षिक उद्देश्य के लिए हैं। यहाँ दी गई सामग्री किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय, कानूनी, वित्तीय या पेशेवर सलाह नहीं है।
इस वेबसाइट पर प्रस्तुत आध्यात्मिक, धार्मिक एवं जीवन से संबंधित विचार भगवद् गीता और अन्य शास्त्रों की व्यक्तिगत समझ, अध्ययन एवं व्याख्या पर आधारित हैं। अलग-अलग व्यक्तियों की सोच एवं अनुभव भिन्न हो सकते हैं।
किसी भी जानकारी को अपनाने या उस पर निर्णय लेने से पहले कृपया विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। इस वेबसाइट की किसी भी जानकारी के उपयोग से होने वाले लाभ या हानि के लिए वेबसाइट या लेखक किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं होंगे।
इस वेबसाइट पर दिखाए जाने वाले विज्ञापन Google AdSense एवं अन्य विज्ञापन नेटवर्क द्वारा प्रदर्शित किए जा सकते हैं, जिनकी सामग्री और सेवाओं पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है।
Bhagavad Gita 2:4 – Ethics vs Responsibility
In verse 2:4, Arjuna questions how he can act against people he respects. This reflects a universal moral conflict.
Professionals, leaders, and individuals often face situations where values clash with responsibilities. Avoiding action feels safe, but creates long-term harm.
The Gita does not dismiss ethical confusion. Instead, it invites deeper understanding before choosing action.
This verse highlights that moral complexity requires wisdom, not withdrawal.
Q: Is avoiding action morally correct?
A: Avoidance often shifts harm rather than preventing it.
Comments
Post a Comment