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Monday, October 13, 2025

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 44

        श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 44

उत्सन्नकुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन ।
नरकेऽनियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम ॥१.४४॥
                            गीता 1:44
हिंदी अनुवाद

जनार्दन! जिन मनुष्यों के कुलधर्म नष्ट हो जाते हैं, उनका अनिश्चितकाल तक नरक में निवास होता है — ऐसा हमने सुना है।


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शब्दार्थ:

उत्सन्न-कुल-धर्माणाम् — जिनके कुलधर्म नष्ट हो गए हैं

मनुष्याणाम् — उन मनुष्यों का

जनार्दन — हे भगवान श्रीकृष्ण

नरके — नरक में

अनियतं — अनिश्चित या दीर्घकाल तक

वासः — निवास या रहना

भवति — होता है

इति — ऐसा

अनुशुश्रुम — हमने सुना है



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भावार्थ :

अर्जुन श्रीकृष्ण से कह रहे हैं —
“हे जनार्दन! जब किसी परिवार का धर्म और परंपरा नष्ट हो जाती है, तो उस कुल के लोगों का पतन होता है। हमने सुना है कि ऐसे लोग नरक में अनिश्चित समय तक दुःख भोगते हैं।”


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विस्तृत व्याख्या:

इस श्लोक में अर्जुन यह बताना चाहते हैं कि युद्ध करने से न केवल लोगों की हत्या होगी बल्कि उनके कुलधर्म (परिवार की धार्मिक परंपराएँ, संस्कार और नैतिक मूल्य) भी नष्ट हो जाएंगे।
जब परिवार में धर्म नष्ट होता है, तो समाज का संतुलन भी बिगड़ जाता है। ऐसी स्थिति में जन्म लेने वाले लोग धार्मिक शिक्षा से दूर होकर पापकर्मों में लिप्त हो जाते हैं।
अर्जुन के अनुसार, यह केवल इस जीवन का नहीं बल्कि आगामी जन्मों तक दुख का कारण बनता है। इसलिए वे युद्ध करने को पाप मान रहे हैं।


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संदेश:

➡ धर्म और संस्कार किसी परिवार की रीढ़ होते हैं।
➡ यदि ये नष्ट हो जाएँ तो समाज का पतन निश्चित है।
➡ अर्जुन का विचार यहाँ गहरे नैतिक और सामाजिक स्तर पर है — वह केवल युद्ध नहीं, मानवता के भविष्य की चिंता कर रहे हैं।

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