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BhagwatGeetaBySun.com एक आध्यात्मिक एवं जीवन-मार्गदर्शन वेबसाइट है, जहाँ भगवद गीता के श्लोकों को सरल भाषा में समझाकर उन्हें आज के जीवन की वास्तविक समस्याओं से जोड़ा जाता है।

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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 24

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 24

              📜 श्लोक 2.24

अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च ।
नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः ॥

             🕉️ हिंदी अनुवाद:

आत्मा न तो काटी जा सकती है, न ही जलाई जा सकती है, न ही जल से भिगोई जा सकती है और न ही वायु से सुखाई जा सकती है। वह नित्य, सर्वव्यापी, अचल, स्थिर और सनातन है।


           ✨ विस्तृत व्याख्या:

इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को आत्मा की अविनाशी और अपरिवर्तनीय शक्ति के बारे में समझा रहे हैं।
वे बताते हैं कि आत्मा पर किसी भी भौतिक तत्व (जैसे अग्नि, जल, वायु, अस्त्र आदि) का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

🔥 आत्मा को कोई जला नहीं सकता:
क्योंकि वह भौतिक नहीं, अपितु आध्यात्मिक ऊर्जा से बनी है।

💧 आत्मा को जल गीला नहीं कर सकता:
क्योंकि आत्मा सूक्ष्म और निर्लेप है।

🌬️ आत्मा को वायु सुखा नहीं सकती:
क्योंकि वह भौतिक गुणों से परे है।

⚔️ आत्मा को कोई काट नहीं सकता:
कोई भी अस्त्र या शस्त्र आत्मा को विभाजित नहीं कर सकता।


आत्मा नित्य, अचल, और सर्वव्यापी है। वह समय, मृत्यु या परिवर्तन से अप्रभावित रहती है।
देह का नाश होता है, पर आत्मा हमेशा रहती है — यही श्रीकृष्ण का मुख्य संदेश है।


      🪔 जीवन से जुड़ा संदेश:

जब हमें समझ आ जाता है कि हमारी वास्तविक पहचान यह अविनाशी आत्मा है — तो हम जीवन के दुख, भय और मोह से ऊपर उठ सकते हैं।
श्रीकृष्ण का यह उपदेश हमें आध्यात्मिक दृष्टिकोण से जीना सिखाता है।


             🕉️ शब्दार्थ:

अच्छेद्यः — जिसे कोई काट नहीं सकता

अदाह्यः — जिसे आग जला नहीं सकती

अक्लेद्यः — जिसे जल गीला नहीं कर सकता

अशोष्यः — जिसे वायु सुखा नहीं सकती

नित्यः — सदा रहने वाला

सर्वगतः — हर जगह व्याप्त

स्थाणुः — स्थिर रहने वाला

अचलः — जो कभी हिलता नहीं

सनातनः — शाश्वत, अनादि और अनंत


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