प्रश्न: गीता 3:42 में इंद्रियाँ, मन, बुद्धि और आत्मा की श्रेष्ठता कैसे बताई गई है? उत्तर: गीता 3:42 में श्रीकृष्ण बताते हैं कि इंद्रियाँ शरीर से श्रेष्ठ हैं, मन इंद्रियों से श्रेष्ठ है, बुद्धि मन से श्रेष्ठ है, और आत्मा बुद्धि से भी श्रेष्ठ है। इसी क्रम को समझना आत्मज्ञान का आधार है। अगर इंद्रियाँ शक्तिशाली हैं, तो उनसे भी ऊपर क्या है? हम अक्सर सोचते हैं कि हमारा शरीर ही सब कुछ है। लेकिन भगवद्गीता 3:42 बताती है — मनुष्य की वास्तविक शक्ति शरीर से कहीं ऊपर है। गीता 3:42 – इंद्रियाँ, मन, बुद्धि और आत्मा का क्रम गीता 3:41 में श्रीकृष्ण ने कहा — पहले इंद्रियों को नियंत्रित करो। अब गीता 3:42 बताती है कि नियंत्रण का अंतिम आधार क्या है। 📘 अध्याय 3 – कर्मयोग (पूरा संग्रह): भगवद गीता अध्याय 3 (कर्मयोग) – सभी श्लोकों का सरल अर्थ व जीवन उपयोग इस अध्याय में कर्मयोग के सभी श्लोक क्रमवार दिए गए हैं, जहाँ निष्काम कर्म, यज्ञ भाव और कर्तव्य पालन को आज के जीवन से जोड़कर समझाया गया है। 📜 भगवद्गीता 3:42 – मूल संस्कृत श्लोक इन्द्रियाणि पराण्याहुरिन...