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BhagwatGeetaBySun.com एक आध्यात्मिक एवं जीवन-मार्गदर्शन वेबसाइट है, जहाँ भगवद गीता के श्लोकों को सरल भाषा में समझाकर उन्हें आज के जीवन की वास्तविक समस्याओं से जोड़ा जाता है।

  • गीता के श्लोकों का व्यावहारिक अर्थ
  • तनाव, क्रोध और चिंता से मुक्ति
  • मन को शांत और स्थिर रखने की कला
  • कर्मयोग द्वारा सही निर्णय

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BhagwatGeetaBySun.com is a spiritual and life-guidance website that explains the wisdom of the Bhagavad Gita in a simple, practical, and modern context to help people gain clarity, peace, and balance in life.

भगवद् गीता अध्याय 2 श्लोक 1 अर्थ हिंदी | श्रीकृष्ण का प्रथम उपदेश

जहाँ करुणा और ज्ञान एक साथ प्रकट होते हैं। अर्जुन की मानसिक स्थिति देखकर श्रीकृष्ण मौन तोड़ते हैं। यह श्लोक दर्शाता है कि जब मन टूटता है, तभी सच्चे मार्गदर्शक का ज्ञान जीवन को नई दिशा देता है।

             भगवद् गीता अध्याय 2 श्लोक 1

सञ्जय उवाच —
तं तथा कृपयाऽविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम्।
विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः॥

शोकग्रस्त अर्जुन से श्रीकृष्ण बोले
युद्धभूमि में शोक और करुणा से भरे अर्जुन को देखकर भगवान श्रीकृष्ण उन्हें उपदेश देना प्रारंभ करते हैं।

गीता 2:1 – करुणा से भरे श्रीकृष्ण

संजय बोले —
“इस प्रकार विषाद से ग्रस्त अर्जुन को देखकर, करुणा से भरे श्रीकृष्ण ने उससे ये वचन कहे।”

इस श्लोक में श्रीकृष्ण का स्वर कठोर नहीं, बल्कि करुणामय है। वे अर्जुन की कमजोरी को दोष नहीं मानते, बल्कि उसे समझकर सही मार्ग दिखाने के लिए तैयार होते हैं।

                                   गीता 2:1
 
भावार्थ

संजय ने कहा — उस समय करुणा से व्याप्त, आँसुओं से भरी आँखों वाले और अत्यंत शोकाकुल अर्जुन को देखकर भगवान श्रीकृष्ण, जो मधुसूदन नाम से प्रसिद्ध हैं, ने ये वचन कहे।

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शब्दार्थ :

सञ्जय उवाच — सञ्जय ने कहा,

तं — उस (अर्जुन को),

तथा — उस प्रकार,

कृपया आविष्टम् — करुणा से व्याप्त,

अश्रु-पूर्ण-आकुल-ईक्षणम् — आँसुओं से भरी, व्याकुल आँखों वाला,

विषीदन्तम् — अत्यंत शोकाकुल,

इदं वाक्यम् — ये वचन,

उवाच — कहा,

मधुसूदनः — भगवान श्रीकृष्ण (जिन्होंने मधु नामक असुर का वध किया)।

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व्याख्या :

इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश का आरंभ होता है। अर्जुन युद्धभूमि में अपने स्वजनों को देखकर अत्यंत दुखी हो गया था — उसकी आँखें आँसुओं से भर गई थीं, मन करुणा से भर गया था और वह मानसिक रूप से विचलित हो चुका था।

संजय, जो यह दृश्य धृतराष्ट्र को सुना रहे हैं, बताते हैं कि जब भगवान ने अर्जुन की यह अवस्था देखी — आँसुओं से भीगी आँखें, करुणा और मोह में डूबा हुआ मन — तब उन्होंने उसे ज्ञान देने का निश्चय किया।

यह श्लोक संकेत देता है कि कर्म, धर्म और आत्मा के ज्ञान की शिक्षा अब प्रारंभ होने वाली है।
भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन की इस दयनीय स्थिति को देखकर करुणा के साथ उसे सच्चा ज्ञान देने की प्रेरणा पाई।

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मुख्य संदेश:

यह श्लोक बताता है कि जब मनुष्य मोह, दया और असमंजस में फँस जाता है, तब भगवान (या गुरु) उसे सच्चे ज्ञान का मार्ग दिखाने के लिए प्रेरित होते हैं। यही से गीता का उपदेश आरंभ होता है।

Geeta 2:1 – Frequently Asked Questions

Q1. Geeta 2:1 में श्रीकृष्ण क्या देखते हैं?
A. श्रीकृष्ण अर्जुन को करुणा और शोक से भरा हुआ देखते हैं।

Q2. अर्जुन की स्थिति कैसी थी?
A. वह मानसिक रूप से विचलित और दुखी था।

Q3. यह श्लोक क्या संकेत देता है?
A. अर्जुन के जीवन में आध्यात्मिक उपदेश की शुरुआत।

आज के जीवन में Geeta 2:1 का महत्व

Geeta 2:1 में श्रीकृष्ण अर्जुन की मानसिक स्थिति को देखकर करुणा से भर जाते हैं। यह श्लोक सिखाता है कि जब कोई व्यक्ति भावनात्मक रूप से टूट रहा हो, तो उसे डांट नहीं बल्कि समझ और मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है।

आज के जीवन में लोग stress, anxiety और confusion से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में harsh advice नुकसान पहुँचा सकती है। यह श्लोक हमें emotional intelligence सिखाता है।

Life Better कैसे करें?

  • दूसरों की स्थिति को समझकर प्रतिक्रिया दें
  • Problem से पहले व्यक्ति को समझें
  • करुणा को कमजोरी नहीं, ताकत मानें

करुणा से दिया गया मार्गदर्शन जीवन को सही दिशा में मोड़ सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

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Bhagavad Gita 2:1 – Compassion Before Correction

In verse 2:1 of the 0, Krishna observes Arjuna overwhelmed by grief, confusion, and emotional paralysis. Before offering guidance, Krishna first understands Arjuna’s emotional condition. This approach reflects a powerful solution to a global problem: reacting to emotional collapse without understanding it.

Across the world today, people face emotional overload due to loss, pressure, injustice, or uncertainty. Often, society rushes toward solutions without acknowledging emotional pain. This leads to shallow fixes and repeated crises.

This verse teaches that compassion is not weakness. Understanding emotional states is the first step toward meaningful resolution. Whether in leadership, family life, or global conflict, ignoring emotional reality leads to poor decisions.

Geeta 2:1 reminds us that sustainable solutions begin with empathy and awareness. Before correcting actions, one must first recognize emotional truth.

FAQ
Q: Why does Krishna remain calm instead of reacting?
A: Because understanding emotions is essential before guiding action.

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