जहाँ आत्मविश्वास दिखावा बन जाए। दुर्योधन अपनी विशाल सेना पर गर्व करता है, लेकिन यह श्लोक संकेत देता है कि बिना धर्म के शक्ति भी अस्थिर होती है।
| दुर्योधन अपनी सेना की रणनीति और भीष्म पितामह की भूमिका को स्पष्ट करता है। |
गीता 1:10 – दुर्योधन का भय
“भीष्म द्वारा संरक्षित हमारी सेना सीमित प्रतीत होती है, जबकि भीम द्वारा संरक्षित पांडवों की सेना अधिक शक्तिशाली लगती है।”
यह श्लोक दुर्योधन के मन का सत्य उजागर करता है — धर्म और विश्वास के बिना शक्ति अधूरी होती है।
Geeta 1:10 – Reality Check
यह श्लोक वास्तविक स्थिति को समझने की सीख देता है। सिर्फ दावा नहीं, वास्तविक तैयारी ज़रूरी है।
Life Better कैसे करें?
- Skills पर लगातार काम करें
- खुद को overestimate न करें
- Action से खुद को साबित करें
सच्ची तैयारी ही आत्मविश्वास लाती है।
👉 गीता 1:9 का पूरा अर्थ पढ़ें
Geeta 1:10 – FAQ
Q. इस श्लोक में क्या तुलना की गई है?
A. पांडव और कौरव सेनाओं की शक्ति की।
Bhagavad Gita 1:10 – The Final Warning of Chapter 1
Geeta 1:10 concludes with a contrast—outer strength hiding inner weakness.
Globally, systems collapse when inner values are ignored.
The Gita teaches that sustainable solutions begin from inner alignment.
Q: What is the key lesson of 1:1–1:10?
A: World problems reflect unresolved inner conflicts.
Comments
Post a Comment