प्रश्न: गीता 3:39 में ज्ञान के शत्रु के रूप में किसे बताया गया है? उत्तर: गीता 3:39 में श्रीकृष्ण कहते हैं कि कामना ज्ञान को ढकने वाला नित्य शत्रु है। यह कभी तृप्त नहीं होती और मनुष्य की विवेक शक्ति को नष्ट कर देती है। अगर इच्छा इतनी शक्तिशाली है, तो वह हमारे भीतर बैठती कहाँ है? हम अक्सर सोचते हैं कि इच्छा अचानक आती है, लेकिन भगवद्गीता 3:39 बताती है कि यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित आंतरिक प्रक्रिया है। 📘 अध्याय 3 – कर्मयोग (पूरा संग्रह): भगवद गीता अध्याय 3 (कर्मयोग) – सभी श्लोकों का सरल अर्थ व जीवन उपयोग इस अध्याय में कर्मयोग के सभी श्लोक क्रमवार दिए गए हैं, जहाँ निष्काम कर्म, यज्ञ भाव और कर्तव्य पालन को आज के जीवन से जोड़कर समझाया गया है। 🌟 आज का गीता संदेश कौरव सेना की शक्ति और भीष्म के नेतृत्व में युद्ध की तैयारी का वर्णन भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 10 में मिलता है। यह श्लोक आत्मविश्वास, रणनीति और युद्ध-पूर्व मानसिकता को दर्शाता है। 👉 गीता 1:10 का भावार्थ विस्तार से पढ़ें गीता 3:39 – इच्छा के तीन ठिकाने: इंद्रियाँ, म...