प्रश्न: गीता 3:30 में श्रीकृष्ण अर्जुन को कर्म करने की क्या विधि बताते हैं? उत्तर: गीता 3:30 में श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि अपने सभी कर्म मुझे अर्पित करके, आसक्ति और स्वार्थ त्यागकर, निराशा और अहंकार से मुक्त होकर कर्तव्य कर्म करो। क्या काम करते समय भी मन शांत रह सकता है? अक्सर हम काम करते हैं, लेकिन भीतर तनाव, डर और अपेक्षाएँ चलती रहती हैं। भगवद्गीता 3:30 एक ऐसा उपाय बताती है, जिससे कर्म बोझ नहीं, बल्कि शांति का माध्यम बन जाता है। 📘 अध्याय 3 – कर्मयोग (पूरा संग्रह): भगवद गीता अध्याय 3 (कर्मयोग) – सभी श्लोकों का सरल अर्थ व जीवन उपयोग इस अध्याय में कर्मयोग के सभी श्लोक क्रमवार दिए गए हैं, जहाँ निष्काम कर्म, यज्ञ भाव और कर्तव्य पालन को आज के जीवन से जोड़कर समझाया गया है। गीता 3:30 – कर्म को अर्पण करने की कला गीता 3:29 में श्रीकृष्ण बताते हैं कि गुणों में उलझा मन कर्म के बंधन में फँस जाता है। गीता 3:30 इसका व्यावहारिक समाधान देती है — कर्म करो, लेकिन उसे अपने अहंकार से अलग कर दो। 📜 भगवद्गीता 3:30 – मूल संस्कृत श्लोक मयि स...